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Monday, February 26, 2018

कॉफी विथ सीएम का बिगड़ा टेस्ट, शिवराज के लिए BJP ने चुना विवादित कॉलेज


भोपाल I मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे विवादित और फर्जीवाड़े के आरोपों से घिरे मानसरोवर डेंटल कॉलेज में 'सीएम विद कॉफी' का कार्यक्रम किया जा रहा है. ये कॉलेज बीडीएस फर्जीवाड़े के कारण चर्चा में आया था.

दरअसल, एमपी एसटीएफ ने 2013 में इस कॉलेज पर शिकंजा कसा था. एसटीएफ ने बीडीएस परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी सचिन जैन, पूर्व प्रिंसिपल विनय कुमार और अकाउंटेंट बसंत वर्मा को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि कॉलेज के जिम्मेदारों ने आंसरशीट में अंकों में हेराफेरी कर परीक्षार्थियों को पास कराया था.

बताया जा रहा है कि बीयू से 700 कॉपियां मूल्यांकनकर्ता प्रोफेसरों के नाम इश्यू कराईं थीं. इश्यू की गई 700 कॉपियां मूल्यांकनकर्ताओं के पास नहीं पहुंचीं और फर्जी तरीके से जांचने के बाद सभी कॉपियां को सीधे बीयू में जमा करा दिया गया. आंसरशीट में की गई हेराफेरी की वजह से एसटीएफ ने एफआईआर दर्ज की थी. इस विवादित डेंटल कॉलेज में 'कॉफी विद सीएम' का कार्यक्रम होना है.

युवा मोर्चा के कार्यक्रम 'सीएम विद कॉफी' के आयोजन स्थल को लेकर उठे सवालों पर अब सियासत भी शुरू हो गई है. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता विभा पटेल ने आरोप लगाते हुए कहा है कि बीजेपी हमेशा से भ्रष्टाचारियों का साथ देती आई है. यही वजह है कि उसकी ओर से ऐसे आयोजन स्थल को चुना गया है जो बीडीएस घोटाले से जुड़ा हुआ है.
वहीं दूसरी तरफ बीजेपी प्रवक्ता लोकेंद्र पाराशर ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष को कार्यक्रम स्थल के बजाए उसके पीछे के मकसद को देखना चाहिए.

Wednesday, January 24, 2018

उत्सव-युवाओं ने दिखाया दम,दिव्यांग के हौसले से मिली प्रेरणा

हजारों युवाओं ने आनंद से मनाया,आनंद उत्सव
कार्यक्रम में विधायक लखन पटेल हुए शामिल, प्रतिभाओं को बांटे प्रमाण पत्र।
55 साल के दिव्यांग ने ट्री साईकिल चलाकर जीती,साइकिल रेस,दी दिव्यांगता को मात,,,
एम.एच.क्लब के संरक्षण में हुआ सफल आयोजन।
जितेंद्र खरे बादल ने किया दर्शकों का भरपूर मनोरंजन


बटियागढ़।बुधवार को बटियागढ़ के लवली पार्क मैदान में आनंद उत्सव कार्यक्रम का विकाश खंड स्तरीय आयोजन समाज सेवी संस्था एम.एच.क्लब संरक्षण में किया गया,कार्यक्रम में स्थानीय विधायक लखन पटेल ने बतौर अध्यक्ष हिस्सा लेकर, आनंद उत्सव के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने बाले प्रतिवाभावी युवाओं को शील और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित करते हुए कार्यक्रम का लुत्फ उठाया।

लोक संगीत, नृत्‍य, गायन, भजन कीर्तन, नाटक तथा खेलकूद की गतिविधियां परिपूर्ण जीवन की एक महत्‍वपूर्ण कड़ी है। इस मान्‍यता के आधार पर आनंद उत्‍सव की परिकल्‍पना की गई है। आनंद विभाग द्वारा आनंद उत्‍सव कार्यक्रम का आयोजन प्रत्‍येक वर्ष 14 जनवरी से मनाने का निर्णय लिया गया था इसी कड़ी में दमोह जिले के बटियागढ़ में विकाश खंड स्तरीय आनंद उत्सव का आयोजन किया गया जिसमें जिसमे युवाओं ने अनेक कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर पूरे मज़े से आनंद उठाया।

ना उम्र का तकाज़ा, ना पैरों का गम,आनंद उत्सव में दिखाया दिव्यांग ने दम,जी हां आनंद उत्सव के दौरान हुई साईकिल रेस में एक 55 साल के बुजुर्ग ने बाजी मारकर ये साबित कर दिया कि हुनर और ज़ज़्बे की न कोई उम्र होती है,न उसे हाँथ पैरों की जरूरत होती है,जरूरत होती है तो सिर्फ मन मे विश्वास,और हौसले की/कुछ ऐसा ही कर दिखाया है 55 साल के कलु आदिवासी ने,कलू अपने दोनों पैरों से विकलांग हैं,लेकिन उन्होंने आनंद उत्सव के दौरान हुई साईकिल रेस में सबको पटखनी देते हुए जीत हांसिल की। जिनका विधायक लखन पटेल ने मंच पर बुलाकर शील और प्रसंशा पत्र देकर सम्मान किया,और उनके हौसले को सराहा।कलू की जीत से उन युवाओं को प्रेरणा जरूर मिलेगी जो नशे की लत में खेल के मैदान को पूरी तरह से भुला चुके हैं।
कार्यक्रम मे मुख्य कार्यपालन अधिकारी आनंद शुक्ला,विधायक लखन पटेल,पं.नरेंन्द्र व्यास,पं.कपिल शुक्ला,भगत पटेल,आनंद त्रिवेदी, जितेंन्द्र सिंह ठाकुर,अरविंद पटेल,इस्माईल खान,संतोष साहू,बद्री विश्वकर्मा,समेत स्थानीय भाजपा नेता व एम.एच.क्लब के सदस्यों की मौजूदगी रही।

Wednesday, October 4, 2017

यूट्यूब पर गोविंद शरण के ‘रिकाल एक घुघूती’ सांग ने मचाई धूम

देहरादून। म्यूजिशियन गोविंद शरण के ‘रिकाल ए घुघूती’ सांग ने इन दिनों ने यूट्यूब पर तहलका मचा रखा है। ‘रिकाल ए घुघूती’ सांग को लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। एक दिन में इसे 2500 लोगों द्वारा पसंद किया गया।

रिकाल ए घुघूती एक पति-पत्नी की जुदाई पर आरारित गाना है। इसमें दिखाया गया है कि पत्नी पति के बिना किस तरह से अकेले पहाड़ के गांव में रहकर घुघूती को याद करती है। यह गाना स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी का लिखा है, जिसे कि गोविंद शरण द्वारा नया लुक दिया गया है। पंच केदार पोडक्शन हाउस ने इन्हें आगे बढ़ाया है। म्यूजिक आशीष नवल का है और वीडियो देव जैन सौरभ घिल्ड़ियाल का है। आर्केटक पर गुरु ने प्रस्तुति दी हैं गोविंद शरण का पहला प्रयास युवा दिलों को काफी पसंद आ रहा है। 

Tuesday, September 26, 2017

BHU विवाद: VC त्रिपाठी से छीने गए सारे अधिकार, चीफ प्रॉक्टर ने दिया इस्तीफा


बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में छात्राओं पर लाठीचार्ज मामले में वाइस चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी पर गाज गिरी है. सूत्रों के अनुसार उनके सारे अधिकार अग्र‍िम आदेश तक सीज कर दिए गए हैं. वहीं विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर ओंकारनाथ सिंह ने इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद इस्तीफे की पेशकश की है.
गिरीश चंद्र त्रिपाठी 26 नवंबर को विश्वविद्यालय के कुलपति पद से रिटायर हो रहे हैं. ऐसे में सूत्रों ने बताया कि वह फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे. दरअसल मंगलवार को कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी, जिसमें इस पूरे मामले में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया. कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने कुलपति को तत्काल हटाने की मांग की है.
वाराणसी के कमिश्नर नितिन गोकर्ण ने मुख्य सचिव राजीव कुमार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. रिपोर्ट में उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रशासन को दोषी ठहराया है. इस बीच बीएयचू प्रशासन ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है.
शासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, गोकर्ण ने अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेज दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएचयू प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत पर संवेदनशील तरीके से गौर नहीं किया और वक्त रहते इसका समाधान नहीं किया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर वक्त रहते इस मामले को सुलझा लिया गया होता, तो इतना बड़ा विवाद खड़ा नहीं होता.
इस बीच, कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने अपने बचाव में कहा कि कार्रवाई उन लोगों पर की गई, जो विश्वविद्यालय की संपत्ति को आग लगा रहे थे. उन्होंने एक समाचार चैनल से बातचीत में छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज और परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने की बात को झुठलाते कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे को प्रभावित करने के लिए 'बाहरी तत्वों' ने कैम्पस का माहौल बिगाड़ा.
उन्होंने कहा कि कुछ लोग कैम्पस में पेट्रोल बम फेंक रहे थे, पत्थरबाजी कर रहे थे. किसी भी छात्रा पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. कार्रवाई का एक भी प्रमाण नहीं है. कुलपति ने कहा, "23 सितंबर की रात लगभग 8.30 बजे जब मैं छात्राओं से मिलने त्रिवेणी छात्रावास जा रहा था, उस समय अराजक तत्वों ने मुझे रोककर आगजनी और पत्थरबाजी शुरू कर दी."
कुलपति ने कहा कि पीड़ित छात्रा और उसकी सहेलियों के साथ उन्होंने दो बार मुलाकात की. छात्राओं ने उन्हें बताया था कि धरने का संचालन खतरनाक किस्म के अपरिचित लोग कर रहे हैं. उन लोगों ने पीड़ित छात्रा को धरना स्थल पर बंधक बनाकर जबरन बिठाए रखा था. पुलिस ने ऐसे तत्वों को कैम्पस से बाहर करने के लिए ही बल प्रयोग किया.
 
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